Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 33, Verse 45
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 33, verse 45 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 33 · श्लोक 45
संस्कृत श्लोक
नाहमात्मनि नो यस्य दृश्यश्रिय इति स्वयम् ।
शान्तेन व्यवहारेण नाहंकारः प्रवर्धते ॥ ४५ ॥
हिन्दी अर्थ
जिन पुरुष की आत्मा में
अहंकार नहीं है और दृश्य शोभाएँ भी नहीं है ऐसी स्थिति से स्वयं ही निवृत्त हुए व्यवहार से अहंकार नहीं
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