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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 33, Verse 48

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 33, verse 48 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 33 · श्लोक 48

संस्कृत श्लोक

श्रीराम उवाच । किमाकृतिरहंकारः कथं संत्यज्यते प्रभो । सशरीरोऽशरीरश्च त्यक्ते तस्मिंश्च किं भवेत् ॥ ४८ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : हे प्रभो, इस अहंकार का क्या आकार है और कैसे देहमात्र में अहंभावरूप तथा देह से अतिरिक्त बुद्धिमात्रोपाधिक अहंकाररूप इसका त्याग होता है एवं इसका त्याग होने पर क्या फल होता है