Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 33, Verse 59

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 33, verse 59 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 33 · श्लोक 59

संस्कृत श्लोक

प्रथमं द्वावहंकारावङ्गीकृत्यान्त्यलौकिकौ । तृतीयाहंकृतिस्त्याज्या लौकिकी दुःखदायिनी ॥ ५९ ॥

हिन्दी अर्थ

उक्त सिद्धान्त का ही फिर अनुवाद कर उपसंहार करते है । देहात्मभावरूप अहंकार की तरह बद्धमूल हुए आदि दो अहंकारं का पहले अंगीकार कर तीसरी लौकिक अहंकृति का, जो अत्यन्त दुःखदायिनी हे, त्याग कर देना चाहिये