Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 35, Verse 46
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 35, verse 46 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 35 · श्लोक 46
संस्कृत श्लोक
सबाह्याभ्यन्तरं त्यक्त्वा सर्वां दृश्यदृशं यदा ।
मनस्तिष्ठति तल्लीनं संप्राप्तं तत्पदं तदा ॥ ४६ ॥
हिन्दी अर्थ
बाह्य ओर आभ्यन्तर
पदार्थो के साथ सब दृश्य दृष्टि का त्यागकर जब मन स्थित होता है तब परम पद को प्राप्त हो उसमें लीन
होकर स्थित होता है