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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 36, Verse 2

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 36, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 36 · श्लोक 2

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । यथोर्मयोऽनभिव्यक्ता भाविनः पयसि स्थिताः । न स्थिताश्चात्मनोऽन्यत्वाच्चित्तत्वे सृष्टयस्तथा ॥ २ ॥

हिन्दी अर्थ

ब्रह्मसत्ता से ही जगत की स्थिति है, उसकी पथक्‌ सत्ता नहीं है । प्राणियों को पृथक्‌ अपनी सत्ता से जो जगत की स्थिति प्रतीत होती है, वह ब्रह्मस्वरूप स्थिति के ज्ञात न होने के कारण ही है, यों समाधान करने के लिए श्रीवसिष्ठजी समाधानानुरूप दृष्टान्त कहते है। श्रीवसिष्ठजी ने कहा : हे श्रीरामचन्द्रजी, जैसे होनेवाली अनभिव्यक्त तरगे जल में अभिन्नरूप से स्थित हैं, भिन्नरूप से उनकी सत्ता नहीं हे वैसे ही चित्तत्त्व में ये सृष्टियाँ सद्रूप आत्मा से पृथक्रूप से स्थित नहीं हैं, क्योंकि उनकी स्वतः सत्ता नहीं हे । उसकी सत्ता से ही स्थित हे