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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 37, Verse 9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 37, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 37 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

राम भावनादन्यस्य भावाभावाः शुभाशुभाः । सृष्टयः परिकल्प्यन्तेऽनात्मन्येवाथवात्मनि ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

हे श्रीरामचन्द्रजी, अन्य वस्तु का अस्तित्व और अभाव, शुभ और अशुभ सृष्टियाँ मायिक दृष्टि से अनात्मभूत माया में ही वासनावश कल्पित हैं अथवा परमार्थदृष्टि से एकमात्र आत्मा होने के कारण आत्मा में ही वासनावश कल्पित हैं