Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 38, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 38, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 38 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
न वासनामये स्पन्दरसे गज इव पल्वले मज्जति तज्ज्ञो मूर्खमनोभोगभूमिमेव पश्यति न सत्तत्त्वं ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
ज्ञानी और अज्ञानियो की दूसरी विशेषता भी कहते है।
ज्ञानी पुरुष जैसे हाथी छोटी तलेया में नहीं डूबता वैसे ही वासनामय चेष्टा रस में मग्न नहीं होता ।
मूर्ख का मन तो विषय भोगो को ही देखता है, परमार्थतत्त्व को नहीं देखता