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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 38, Verse 2

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 38, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 38 · श्लोक 2

संस्कृत श्लोक

यतः कर्तृत्वं नाम किमुच्यते । यो ह्यन्तस्थाया मनोवृत्तेर्निश्चय उपादेयताप्रत्ययो वासनाभिधानस्तत्कर्तृत्वशब्देनोच्यते ॥ २ ॥

हिन्दी अर्थ

पहले विचार करना चाहिये कि कर्तृत्व किसे कहते हैं । शारीरिक क्रिया तो कर्तृत्व है नहीं, क्योंकि जो चेष्टा अबुद्धिपूर्वक की जाती है उसमें “मे करता हूँ” ऐसी प्रतीति नहीं होती । किन्तु पूर्व पूर्व कर्तृत्व की वासना से अनुरक्त मनोवृत्ति से उत्पन्न हुई, यह कार्य है, इस प्रकार की चिन्तवृत्तिरूप से परिणत मानसिक क्रिया ही कर्तृता हे