Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 38, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 38, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 38 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
मोक्षोऽस्ति न संसारे स्वसंसक्तमनसामिहासंसक्तमनसां त्वेतत्सर्वमेवास्ति ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
इसलिये तत्त्वज्ञानियों की मोक्ष कल्पना भी नहीं है, ऐसा कहते है ।
जिसका मन पूर्ण आत्मा में ही संलग्न है, उस ज्ञानियों की दृष्टि से संसार में मोक्ष नहीं है । आत्मा
में जिनका मन संलग्न नहीं है, ऐसे देहाध्यासदृष्टि को प्राप्त लोगों की दुष्टि से तो यह बन्ध-मोक्ष आदि
सब है ही