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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 38, Verse 5

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 38, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 38 · श्लोक 5

संस्कृत श्लोक

तस्मादज्ञाततत्त्वानां पुंसां कुर्वतामकुर्वतां च कर्तृता नतु ज्ञाततत्त्वानामवासनत्वात् ॥ ५ ॥

हिन्दी अर्थ

भले ही वासना ही कर्तृता और भोक्तृता हो, फिर भी ज्ञानी ओर अज्ञानी के अन्तर की सिद्धि कैसे हुई, इस पर कहते है । इसलिए जिन पुरुषों को तत्त्वज्ञान नहीं हुआ, वे चाहे कर्म करें या न करें उनमें कर्तृता होती है, किन्तु जिन लागो को तत्त्व का परिज्ञान हो चुका, वासना रहित होने के कारण वे चाहे करे या न करें, उनमें कर्तृता नहीं होती