Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 39, Verses 10–13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 39, verses 10–13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 39 · श्लोक 10-13
संस्कृत श्लोक
यो यस्माज्जायते स तत्सदृश एव भवति ॥ १० ॥
यथादीपाद्दीपःपुरुषात्पुरुषः सस्यात्सस्यम् ॥ ११ ॥
यतो निर्विकाराद्यदागतं निर्विकारेणैवानेन भवितव्यम् ॥ १२ ॥
अथैतद्व्यतिरिक्तं चिदात्मनस्तन्निष्कलङ्कस्य परमेश्वरस्य येयं कलङ्कापत्तिरित्याकर्ण्य भगवान् ब्रह्मर्षिरुवाच ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
लोक में जो
जिससे उत्पन्न होता है, वह उसके सदुश ही होता है, जैसे दीपक से दीपक, पुरुष से पुरुष तथा अन्न
से अन्न। यदि यह ब्रह्म से अतिरिक्त है, तो निष्कलंक परमेश्वर की जो जगद्भावपत्ति आपने कही है,
यह कलंकापत्ति की ही उक्ति कही जायेगी । यह सुनकर भगवान श्रीवसिष्ठजी ने कहा