Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 39, Verse 34
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 39, verse 34 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 39 · श्लोक 34
संस्कृत श्लोक
यदीश्वरो व्यक्तरूपो विचित्रतामुपेत्य निदर्शयति ॥ ३४ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे पद्मराग मणि के महलों में आकाश का प्रतिबिम्ब आधार की लालिमा से ही लाल होता है,
वैसे ही इस जगत में जो कुछ है, होगा और हुआ था, वह सब स्वत: असत् होता हुआ भी ब्रह्म की सत्ता
से सत्-सा है, यह अर्थ है ॥३ ३॥ क्योकि ईश्वर व्यक्तरूप हो विचित्रता को प्राप्त होकर अपने स्वरूप
को दिखलाता है