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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 40, Verse 21

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 40, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 40 · श्लोक 21

संस्कृत श्लोक

तज्जः स एव भवति वह्नेर्वह्निरिवोत्थितः । जन्योऽयं जनकश्चायमित्युक्ता भेदकल्पना ॥ २१ ॥

हिन्दी अर्थ

इस तरह सत्ता के भेद के अभाव से भेदप्रतीति मिथ्या ही है, ऐसा कहते हैं। अग्नि से उत्पन्न हुई अग्नि की भाँति वही उससे जन्य होता है । यह जगत जन्य है, वह जनक है, यह भेद कल्पनामात्र है यानी मिथ्या है