Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 40, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 40, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 40 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
इदमन्यदिदं चान्यदिति शब्दार्थविक्लवः ।
उक्तावेव न देवेऽस्ति प्रमितौ भिन्नता यतः ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
यह जगत भिन्न है, यह ब्रह्म भिन्न है, यह शब्द ओर
अर्थ का व्यवहारश्रम वचनमात्र में है, परमात्मा में नहीं है, कारण कि "वाचरम्भरणं विकारो नामधेयम्
ऐसी श्रुति है, क्योकि परिच्छेद होने पर ही तो भेद प्रतीत होगा