Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 40, Verse 34
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 40, verse 34 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 40 · श्लोक 34
संस्कृत श्लोक
सर्वस्मात्सर्वगात्तस्मादनन्ताद्ब्रह्मणः पदात् ।
नान्यत्किंचित्संभवति तदुत्थं यत्तदेव तत् ॥ ३४ ॥
हिन्दी अर्थ
सर्वस्वरूप, सर्वव्यापक उस अनन्त ब्रह्मपद से अन्य कुछ नहीं उत्पन्न हो सकता
है, जो कुछ उत्पन्न है, वह ब्रह्म ही है