Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 41, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 41, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 41 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
एतद्विचित्ररूपाभिर्युक्तिभिर्बहुशः पुनः ।
विस्तरेणैव वक्तव्यं सिद्धान्तावसरेऽनघ ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
हे निष्पाप श्रीरामचन्द्रजी, सिद्धान्त के
अवसर पर असंभावना के नष्ट हो जाने के बाद निर्वाण प्रकरण में अनेक तरह की युक्तियों से बहुत बार
विस्तारपूर्वक मैं यह आपसे कहूँगा