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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 41, Verse 5

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 41, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 41 · श्लोक 5

संस्कृत श्लोक

ज्ञानदृष्टौ प्रसन्नायां प्रबोधे विततोदये । यथावज्ज्ञास्यसि स्वस्थो मद्वाग्दृष्टिबलाबलम् ॥ ५ ॥

हिन्दी अर्थ

यदि श्रीरामचन्द्रजी कहे कि कब मुझे तात्पर्यज्ञान होगा ? तो इस पर कहते है । ज्ञानदुष्टि के स्वच्छ होने पर ओर प्रबोध के उदय का विस्तार होने पर स्वरूप में स्थित आप मेरे वचनों की तथा उनसे प्राप्त तत्त्वदृष्टि की अन्य के वचनो और तत्प्रयुक्त दृष्टि की अपेक्षा प्रबलता यथार्थरूप से समझेंगे