Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 41, Verse 7
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 41, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 41 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
यदा पुरा ज्ञास्यसि तत्सत्यमत्यन्तनिर्मलम् ।
वाच्यवाचकशब्दार्थभेदं त्यक्ष्यसि वै तदा ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
तो कब तक शब्द अर्थ ओर वाक्यरचना के भ्रम का अनुसरण करना चाहिए, इस पर कहते हैं।
जब उस सत्य, अत्यन्त निर्मल आत्मा का ज्ञान कर लेंगे, तब अवश्य ही आप वाच्य, वाचक और
शब्दार्थ के भेद का त्याग कर देंगे। जब तक वाक्यार्थ का अपरोक्ष नहीं होगा, तब तक शब्द और अर्थ के
भेद का अनुसरण करना चाहिए, यह अर्थ है