Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 44, Verse 22
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 44, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 44 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
स्वरूपं गन्धवत्स्थूलं येनोदेष्यति मेदिनी ।
अथेत्थंभूततन्मात्रवेष्टितं तनुतां जहत् ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर इस प्रकार भूततन्मात्राओं से वेष्टित अपने सूक्ष्म शरीर का त्याग कर रहा मन आकाश में
देदीप्यमान आग की चिन्गारी के तुल्य अपने स्वरूप को देखता है