Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 44, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 44, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 44 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
स्थूलतामेति पाकेन मनो बिल्वफलं यथा ।
मूषास्थद्रुतहेमाभं स्फुरितं विमलाम्बरे ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
संवि के अन्दर रखे हुए पिघले सोने के समान बाहर स्थूल भास्वर ओर अन्दर
सूक्ष्म भास्वर वह तेज निर्मल आकाश में स्फुरित होकर स्थूल देह से युक्त आगे कहे जानेवाले अवयवों
की रचना को अपने स्वभाव से ग्रहण करता हे