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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 44, Verse 34

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 44, verse 34 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 44 · श्लोक 34

संस्कृत श्लोक

अनादिमध्यपर्यन्तं कदाचिदमलं पयः । कदाचित्कल्पकालाग्निज्वालाभास्वरमण्डकम् ॥ ३४ ॥

हिन्दी अर्थ

कभी (पृथिवी की सृष्टि के बाद और प्राणियों की सृष्टि के पूर्व) हरे रंग के वन की यानी वृक्षों से व्याप्त सारी पृथिवी की कल्पना करता है । कभी (पाद्मकल्प में) भगवान विष्णु की नाभि से उत्पन्न हुए काले कमल की कलिका की सृष्टि करता है