Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 44, Verse 47
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 44, verse 47 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 44 · श्लोक 47
संस्कृत श्लोक
नानाचारसमाचारं गन्धर्वनगरे यथा ।
तासां स्वर्गापवर्गार्थं धर्मकामार्थसिद्धये ॥ ४७ ॥
हिन्दी अर्थ
उनके स्वर्ग और मोक्ष के लिए धर्म, अर्थ और काम की सिद्धि के
लिए अनेक प्रकार के अनन्त शास्त्रों की कल्पना की