Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 45, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 45, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 45 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
पश्य भावनया प्राप्तं मनसैवात्मजं वपुः ।
तस्मात्तत्कलनां राम सर्वशक्तियुतां विदुः ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
वह यह ईश्वर की सर्वशक्ति है, इसका अपने मन में ही प्रत्यक्ष दर्शन किया जा सकता है, ऐसा
कहते हैं।
मन ने अपने से उत्पन्न हुआ शरीर भावना से प्राप्त किया है, इस बात को आप देखिये । इसलिए
हे श्रीरामचन्द्रजी, उस मन की कल्पना को ज्ञानियों ने सर्वशक्तिसंपन्न बताया है । जगत में विचित्र
पदार्थ शक्तियाँ भी सर्वशक्ति मन की कल्पना से ही हैं। यह भाव है