Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 45, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 45, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 45 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
ब्रह्मैवेदं जगत्सर्वमन्यतायास्ततः कुतः ।
प्रसङ्गः कीदृशः कोऽसौ क्व वा सापरितिष्ठति ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
यह सम्पूर्ण जगत ब्रह्म ही है। इसलिए भेद का
प्रसंग किस प्रमाण से, किसके प्रकार का, कौन और कहाँ हो सकता है ?