Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 45, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 45, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 45 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
वस्तुन्यसति लोकोऽयं यातु काममवस्तुनि ।
यस्तु वस्तु परित्यज्य यात्यवस्तु स नश्यति ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
इसके अनुगमन से केवल अनर्थ ही प्राप्त नहीं होते, किन्तु पुरुषार्थ का नाश भी होता है, ऐसा
कहते हैं।
यदि वस्तु न हो, तो ये लोग भले ही अवस्तु का अनुसरण करे, किन्तु जो वस्तु का परित्यागकर
अवस्तु का अनुगमन करता है, वह पुरुषार्थ से च्युत हो जाता है