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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 45, Verse 39

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 45, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 45 · श्लोक 39

संस्कृत श्लोक

असदेव यदत्यन्तं तस्मात्किं नाम नश्यति । नाशाभावे हि दुःखस्य कः प्रसङ्गो महामते ॥ ३९ ॥

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार नाश के स्वीकार द्वारा शोक की अयोग्यता कहकर वस्तुतः नाश ही किसी का नहीं है, ऐसा कहते हैं। जो अत्यन्त असत्‌ ही है, इसलिए उसका नाश ही क्या होगा ? जब नाश नहीं है तब हे महामते, दुःख का कौन अवसर है ?