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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 46, Verses 31–32

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 46, verses 31–32 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 46 · श्लोक 31

संस्कृत श्लोक

स्पष्टां दृष्टिमवष्टभ्य निर्मानो गतमत्सरः । विहरास्मिन्भुवः पीठे परां सिद्धिमवाप्स्यसि ॥ ३१ ॥ स्वस्थः सर्वेहितत्यागी दूरालोकनवाञ्छनः । परां शीतलतामन्तरादाय विहरानघ ॥ ३२ ॥

हिन्दी अर्थ

स्पष्ट दृष्टि का अवलम्बन करके मानरहित ओर मात्सर्यरहित आप इस पृथ्वी तल में विहार कीजिये, आप अवश्य ही परम सिद्धि को प्राप्त होगे