Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 46, Verse 7
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 46, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 46 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
अतो राघव तत्त्वज्ञो व्यवहारेषु संसृतेः ।
नष्टं नष्टमुपेक्षस्व प्राप्तं प्राप्तमुपाहर ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
इसलिए हे श्रीरामचन्द्रजी, संसार के व्यवहारो में तत्त्वज्ञ आप जो-जो वस्तु नष्ट हो, उसकी उपेक्षा
कीजिये और जो जो प्राप्त हो उसका उपभोग कीजिये