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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 46, Verse 9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 46, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 46 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

संसारसंभ्रमे ह्यस्मिंश्छन्नात्मन्याततायिनि । तथा विहर संबुद्धो यथा नायासि मूढताम् ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

संसार में भटकानेवाले, मारने के लिए गुप्त छिपे हुए, विष, शस्त्र अग्नि आदि द्वारा मारने के लिए समीप में आनेवाले अतएव आततायी इस काम के विषय में, बोध के लिए अप्रमत्त हुए आप व्यवहार कीजिये जिससे आप मूढता को प्राप्त न हों