Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 47, Verse 1
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 47, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 1
संस्कृत श्लोक
श्रीराम उवाच ।
भगवन्सर्वधर्मज्ञ सर्ववेदाङ्गपारग ।
आश्वस्त इव तिष्ठामि शुद्धाभिर्भवदुक्तिभिः ॥ १ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : हे भगवन्, आप सब धर्मो के तत्त्वज्ञ ओर सब वेद, वेदांगों के पारदर्शी है ।
आपकी स्वच्छ उपदेशवाणियों से जिसके सिर का बोझ हट गया, दूर मार्ग मेँ चलने का एवं भूख का
परिश्रम निवृत्त हो गया, ऐसे पुरुष के समान मैं बड़े आराम से स्थित हूँ
सर्ग सन्दर्भ
छियालीसवाँ सर्ग समाप्त सैंतालीसवाँ सर्ग अतीत, भावी और वर्तमान करोड़ों ब्रह्मा और ब्रह्माण्डों का तथा नियत ओर अनियत क्रमवाले देवता आदि का वर्णन ।