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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 47, Verse 16

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 47, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 16

संस्कृत श्लोक

भानोर्गणयितुं शक्या रश्मिषु त्रसरेणवः । आलोलवपुषो ब्रह्म तत्त्वेन जगतां गणाः ॥ १६ ॥

हिन्दी अर्थ

भले ही सूर्य की किरणों में चंचल त्रसरेणु गिने जा सकते हैं, पर ब्रह्म में चंचल ब्रह्माण्डों के समूह नहीं गिने जा सकते