Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 47, Verse 35
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 47, verse 35 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 35
संस्कृत श्लोक
कदाचित्प्रथमं वारि प्रतिष्ठामधिगच्छति ।
ततः प्रजायते ब्रह्मा वारिजोऽसौ प्रजापतिः ॥ ३५ ॥
हिन्दी अर्थ
कभी जल पहले स्थूलतारूप से स्थिति को प्राप्त होता है, उससे ब्रह्मा उत्पन्न होते है,
इसलिए वे जलज प्रजापति कहे जाते हैं