Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 47, Verse 46
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 47, verse 46 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 46
संस्कृत श्लोक
एवमन्तर्विहीनासु विचित्रास्विह सृष्टिषु ।
विचित्रोत्पत्तयो राम ब्रह्मणो विविधा गताः ॥ ४६ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, इस प्रकार प्रत्यगात्मा में अविद्यमान इन विचित्र सृष्टियों मे ब्रह्मा की
बहुत-सी विचित्र उत्पत्तियाँ बीत चुकी हैं