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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 47, Verses 48–49

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 47, verses 48–49 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 48

संस्कृत श्लोक

मनोविजृम्भणमिदं संसार इति संमतम् । संबोधनाय भवतः सृष्टिक्रम उदाहृतः ॥ ४८ ॥ सात्त्विकीप्रभृतयो याश्च जातयश्चेत्थमागताः । इति ते कथनायैष सृष्टिक्रम उदाहृतः ॥ ४९ ॥

हिन्दी अर्थ

यह संसार मन का विलासमात्र है, यह सिद्धान्त हे । आपके सम्यग्‌ ज्ञान के लिए मैंने यह सृष्टि क्रम कहा हे