Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 47, Verse 52
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 47, verse 52 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 52
संस्कृत श्लोक
देहोत्पत्तौ विनाशे च दीपानां ब्रह्मणामपि ।
कालेनाधिकतां त्यक्त्वा नाशे भेदो न कश्चन ॥ ५२ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि कोई कहे अल्पकालस्थायी दीपक दो परार्धे तक रहनेवाले ब्रह्मा आदि के शरीरों के उपमान
कैसे हो सकते हैं, इस पर कहते हैं।
दीपों के और ब्रह्माओं के शरीरों की उत्पत्ति और विनाश में काल की अधिकता के अलावा इस
विनाश में और कोई भेद नहीं है