Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 47, Verse 56
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 47, verse 56 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 56
संस्कृत श्लोक
अनाहते प्रतप्तेऽयःपिण्डेऽनलकणा इव ।
इमे भावाः स्थिता नित्यं चिदाकाशे स्वभावतः ॥ ५६ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे पत्थर आदि के आघात से रहित, तपाये हुए लोह-पिण्ड में आग की चिनगारियाँ स्थित
रहती हैं वैसे ही ये सब पदार्थ चिदाकाश में मायारूप स्वभाव से नित्य स्थित हैं