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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 49, Verse 28

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 49, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 49 · श्लोक 28

संस्कृत श्लोक

आदरोन्मुक्तकुसुमं सिद्धानां व्योमचारिणाम् । स्वागतानीव कुर्वाणं कोकिलालिकुलारवैः ॥ २८ ॥

हिन्दी अर्थ

आकाश में चलनेवाले सिद्धो का वह आदरपूर्वक पुष्पवृष्टि कर कोयल ओर भ्रमरो की ध्वनियों से मानों स्वागत कर रहा था