Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 49, Verse 32
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 49, verse 32 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 49 · श्लोक 32
संस्कृत श्लोक
क्वचित्कुसुमगुच्छाच्छफणामणिगणावृतम् ।
पातालादुत्थितं शेषमिव व्योमदिदृक्षया ॥ ३२ ॥
हिन्दी अर्थ
कहीं पर फूलों के गुच्छेरूप फणों में स्थित निर्मल
मणियों से आवृत वह आकाश को देखने की इच्छा से पाताल से निकले हुए शेषनाग के समान स्थित
था