Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 49, Verse 34
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 49, verse 34 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 49 · श्लोक 34
संस्कृत श्लोक
निबिडदलनिवाहभिन्नकोशैः कुसुमलतानवमण्डपैरुपेतम् ।
पुरमिव गगने कदम्बवृक्षं खगकुलनागरसंकुलं ददर्श ॥ ३४ ॥
हिन्दी अर्थ
उस कदम्बवृक्ष को, जो घन पत्तों के समूहों में
खिली हुई कलियाँवाले, पुष्पलताओं के नूतन मण्डपं से युक्त था और पक्षिराशिरूप नागरिकजनों
से युक्त था, आकाश में निर्मित नगर की भाँति उसने देखा