Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 5, Verse 2
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 5, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 5 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
यथायं मनसि स्फारः संसारः स्फुरति स्फुरन् ।
दृष्टान्तदृष्ट्या स्फुटया तथा कथय मेऽनघ ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
हे पुण्यचरित,
प्रकाश हो रहा यह विशाल संसार जैसे मन मेँ स्फुरित होता है वैसे स्पष्ट दृष्टान्त के प्रदर्शन द्वारा
आप मुझसे कहिये