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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 5, Verse 4

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 5, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 5 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

लवणस्य यथा राज्ञश्चेन्द्रजालाकुलाकृतेः । चण्डालत्वमनुप्राप्तं तथेदं मनसि स्थितम् ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

इन्द्रजाल से व्याकुल चित्तवाले राजा लवण को जिस प्रकार चण्डालत्व प्राप्त हुआ था वैसे ही यह जगत मन में स्थित हे