Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 51, Verses 20–21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 51, verses 20–21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 51 · श्लोक 20,21
संस्कृत श्लोक
गच्छ तन्वङ्गि मासेन पूजार्हमलिलोचनम् ।
प्रसोष्यसे सुतं कान्तं प्रसूनमिव सल्लता ॥ २० ॥
किंत्वसौ मरणावेशयायिन्या नस्त्वया सुतः ।
याचितः कृच्छ्रं संप्राप्य ज्ञाता तेन भविष्यति ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
हे सुन्दरी, तुम जाओ, एक महीने में जैसे लता सुन्दर फूल
को पैदा करती है, वैसे ही तुम भी पूजा योग्य, भँवरों के समान नेत्रवाले, सुन्दर पुत्र को पैदा करोगी।
किन्तु प्राण संकट को प्राप्त करके आत्मघात के संकल्प से मेरे पास आई हुई तुमने मुझसे यह पुत्र माँगा,
अतएव यह तत्त्वज्ञानी होगा, अन्य वनदेवियों के पुत्रों के समान यह भोगलम्पट नहीं होगा