Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 53, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 53, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 53 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
भविष्यन्नवनिर्माणं स व्याप्नोति तदा पुरम् ।
यदा संकल्पितं वस्तु क्षणादेव प्रपश्यति ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
तस्येच्छा जायते“ इत्यादि के तात्पर्य का पुत्र द्वारा उक्त विरोध के परिहार से वर्णन करते हैं।
जब वह संकल्पित वस्तु को क्षण भर में ही देखने लगता है तब जिसका निर्माण आगे होनेवाला हो,
ऐसे नगर को (स्वप्नजगत को) प्राप्त होता है