Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 54, Verse 1
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 54, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 1
संस्कृत श्लोक
पुत्र उवाच ।
कीदृशस्तात संकल्पः कथदुपद्यते प्रभो ।
कथं च वृद्धिमाप्नोति कथं चैष विनश्यति ॥ १ ॥
हिन्दी अर्थ
पुत्र ने कहा : हे तात, यह संकल्प केसा है ? हे प्रभो, यह कैसे उत्पन्न होता है, कैसे वृद्धि को
प्राप्त होता है ओर कैसे नष्ट होता है ?
सर्ग सन्दर्भ
तिरपनवाँ सर्ग समाप्त चौवनवाँ सर्ग संकल्प की जैसे उत्पत्ति होती है, जैसे उसका स्वरूप है, जैसे वह घनता को प्राप्त होता है ओर जिस उपाय से उसका उच्छेद होता है, इन सबका वर्णन ।