Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 54, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 54, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
असन्नेवास्य जातोऽसि कुतो जन्मविलासतः ।
व्यर्थमेवावमूढोऽसि संकल्पवशतः स्वतः ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
इस जन्म आदि के
सम्बन्धी तुम कभी न होते हुए भी भ्रान्ति से उत्पन्न हुए हो । तो विवेक पूर्णतारूप आत्मतत्त्व के स्फुरण
से जन्म कहाँ ? संकल्पवश तुम व्यर्थ मूढ हुए हो