Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 54, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 54, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
संकल्पनादृते नेह किंचिदेवास्ति कुत्रचित् ।
तमेव हृदयाच्छिन्धि किमेतत्परिशोचसि ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
संकल्प के सिवा यहाँ कहीं पर कुछ भी नहीं हे, इसलिए हृदय
से संकल्प को ही तुम दूर करो । व्यर्थ अन्य का शोक क्यों करते हो ?