Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 54, Verse 39
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 54, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
असत्कल्पैर्विकल्पैर्यत्संसारो न जितो मुधा ।
स्तोकेनाशु लयं याति क्वासद्वस्तु चिरं स्थितम् ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
असत्य विकल्पों से युक्त मिथ्या
संसार को इतने समय तक जो तुमने नहीं जीता, यह उपाय न जानने के कारण ही हुआ । तनिक भी
उपाय के परिज्ञान से यह शीघ्र लय को प्राप्त होता है । भला बतलाइये तो सही, असत् वस्तु कहीं
चिरकाल तक रहती है ?