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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 55, Verse 23

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 55, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 55 · श्लोक 23

संस्कृत श्लोक

काननोपान्तनगरीघुंघुमाकर्णनेच्छया । क्षणमुत्कर्णमाशान्तचारुवर्वणटांकृतैः ॥ २३ ॥

हिन्दी अर्थ

उसने दिशाओं में नीली मक्खियों की सुन्दरध्वनियों से निवेदित हुए-से वनोपान्तरूपी नगरी के मृग, पक्षी आदि के शब्दरूपी घुंघुम को सुनने की इच्छा से मानों क्षणभर के लिए अपने कान ऊँचे कर रक्खे थे