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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 55, Verse 31

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 55, verse 31 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 55 · श्लोक 31

संस्कृत श्लोक

एवंगुणविशिष्टं तं समालोकयतो मम । महोत्सवेन सदृशी सा बभूव तमस्विनी ॥ ३१ ॥

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार के गुणों से युक्त उस कदम्ब वृक्ष को दिव्यदृष्टि से देख रहे मेरी वह अँधेरी रात्रि महोत्सव के सदृश हो गई