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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 55, Verse 5

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 55, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 55 · श्लोक 5

संस्कृत श्लोक

मामथालोक्य संप्राप्तं दाशूरोऽर्घसपर्यया । वितीर्णविष्टरं पत्रपूजया पर्यपूजयत् ॥ ५ ॥

हिन्दी अर्थ

मुझे आया हुआ देखकर दाशूर ने आसन देकर अर्घ्य एवं फल, पत्र, पुष्प आदि से मेरी पूजा की